पूंजीपति भिखारी पहुंच गये भीख मांगने !
अगर स्थानीय समाचार पत्रों में छपी खबरों को सही माने तो साफ हो जाता है कि अपने आपको पूंजीपति सरमायेदार और धनबल पर बने समाज के अगडे समझने वाले लोग चुनावी टिकटों की भीख मांगने पहुंच गये भाजपा के दफ्तर में।
ताजा खबर है कि राजस्थान की राजधानी जयपुर के जैन श्वेतामबर समाज के धनबल पर बने स्वंयभूं नेता अपने आपको समाज का अगडा बता कर भारतीय जनता पार्टी के आकाओं के पास चुनावी टिकटों की भीख मांगने के लिये भाजपा के दफ्तर में पहुंच गये। उन्होंने जैन समाज की दुहाई देकर राजस्थान की राजधानी जयपुर की दो विधान सभा क्षेत्रों से चुनावी टिकट की भीख मांगते हुये बाकायदा एक ज्ञापन भी दिया।
बताया जाता है कि भाजपाई टिकटों की भीख मांगो मण्डली में जो लोग शामिल रहे उनमें श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संद्य की कार्यकारिणी के सदस्य श्री विमल चंद सुराणा व श्री उत्तम चंद बडेर शामिल थे। पूरा जैन श्वेताम्बर समाज जानता है कि खरतरगच्छ संद्य के पदाधिकारी रहते हुये भाजपाई विधान सभा टिकिट के लिये भूखे इन पूंजीपति भिखारियों ने समाज का सत्यानाश कर उसे दोराहे पर खडा कर दिया था। नतीजन समाज ने इन्हें इनके पदों से उखाड फैंका ! लेकिन पूंजीपति-सामन्तवादी गठजोड के कारण नये चुनिन्दा पूंजीपति-सरमायेदारों और इनके पिछलग्गूओं ने इन्हें और इनके रिश्ते में एक भाई श्री ऋषभचंद पूंगलिया को सहवरित कर कार्यकारिणी में ले लिया। बहिन श्रीमती जतन कंवर समाज की अध्यक्ष हैं ही और कई अन्य रिश्तेदार कार्यकारिणी में ! चांदी कूट रहे हैं ! अब अपने आपको समाज का अगडा बता कर। खरतरगच्छ संद्य के चुनावों में हुई बेइज्जती और फजियत को भूल गये बेशर्मी के साथ और पहुंच गये विधान सभा चुनावी टिकटों की भीख मांगने भाजपा के दफ्तर में। लेकिन इन भाजपाई टिकटों के भिखारियों से हमारा सीधा सवाल है ?
तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के समय में जब हमने समाजहित में जैन समाज को राजस्थान में अल्पसंख्यक द्योषित करवाने का संघर्ष किया था, तब ये तथाकथित स्वंयभूं समाज सेवी बहन-भाइयों का कुनबा किस अन्धकार में गुम हो गया था। यह हमारा-समग्र जैन समाज का संघर्ष था, जिसके आगे झुक कर श्री अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान में जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी के दफ~तर में जाकर विधान सभा की दो सीटों के टिकटों की भीख मांगने वाले ये निकम्मे नाकारा लोग जो अपने आपको समाज का स्वंयभूं अगडा आरोपित करते हैं, कौन से बिल में घुस गये थे जब श्री अशोक गहलोत सरकार के पतन के बाद आई भाजपानीत श्रीमती वसुन्धरा राजे सरकार जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित करने के इस नोटिफिकेशन को दबा कर बैठ गई और 6 महिनों में विधान सभा में बिल पेश कर पारित नहीं करवाया तथा नोटिफिकेशन का आर्डिनेन्स लैप्स हो गया। यह सब राज्य सरकार के रेकार्ड पर उपलब्ध है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संद्य के दबाव में आकर भाजपानीत श्रीमती वसुन्धरा राजे सरकार की इस गैर जुम्मेदारान हरकत का इन लोगों ने क्यों आज तक विरोध नहीं किया ? भीनमाल काण्ड हो या ऋषभदेव मंदिर प्रकरण और उससे जुडे जैन समाज पर हिन्दुत्ववादियों के अत्याचार का मामला हो या जैन मंदिरों में चोरियों, जैन साधु-साध्वियों के अपमान के प्रकरण ! कभी उतरे सडकों पर संघर्ष के लिये ? नहीं ! कैसे उतरते ? पूंजीपति-सरमायेदार जो हैं ! शान में बट्टा लग जाता ! लेकिन एक काम इन्होंने जरूर किया कि जब जब जैन समाज संघर्ष के लिये सडकों पर उतरा, संघीयों के साथ मिल कर जैन समाज के जन आन्दोलनों को ठण्डे छींटे मार कर उसे येनकेन प्रकेरण कमजोर कर खत्म करने का प्रयास किया !
आज भी भाजपा के दफ्तर में पहुंच गये विधान सभा टिकट की भीख मांगने ! जिन्होंने हमारे समाज को सिर्फ घाव दिये हैं, हमारा अल्पसंख्यक का दर्जा छीना है, हमारी जैन संस्कृति को अक्षुण्ण रखने का अधिकार छीना है, हमारी शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्तता का अधिकार छीना है, वे दे ही क्या सकते हैं हमारे समाज को और टिकट मांगने वाले ये वो लोग हैं, जो कुण्डली मार कर बैठे हैं, श्वेतामबर समाज की कुछ संस्थाओं, जैसे कि श्री वीर बालिका स्कूल व कालेज सहित अन्य संस्थाओं पर और दुर्गति कर डाली समाज की इन संस्थाओं की। फिर भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लडने की हसरत इनके दिल में अभी हिचकोले ही ले रही है।
अब हम, "अपने आपको जैन समाज का अगडा समझने वाले" श्री विमल चंद सुराणा को साफ-साफ चुनौती देना चाहेगें कि हिम्मत है तो भाजपा का टिकिट लेकर राजस्थान की किसी भी विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लडो ! उन्हें यही जैन समाज निश्चित रूप से पटखनी देगा हम उनसे वादा करते हैं। हिम्मत है तो उतरें मैदान में !
जैन यूनाईटेड लिबरेशन फ्रण्ट