19/8/2008
सम्माननीय श्री मनमोहन सिंह जी,
माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार, नई दिल्ली-110001.
विषय : जैन संस्कृति के संस्थापक राष्ट्र पुरूष प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के जन्म एवं निर्वाण दिवस पर सार्वजनिक अवकाश द्योषित करने का आग्रह !
महोदय,
आदिपुरूष ऋषभदेव का मानव संस्कृति की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऋषभदेव के नेतृत्व में ही मानवधर्मसूत्र में वर्णित निर्देशों के अनुरूप आज से 5500 वर्ष पूर्व मानव सभ्यता का विकास हो सका ! जिन संस्कृति के रचनाकार राष्ट्रपुरूष ऋषभदेव, चकृवर्ती भरत से लेकर जिनशासनाध्यक्ष पाश्र्ववीर भट्ट तक 5500 पूर्व से 2800 वर्ष पूर्व तक पूरा वर्तमान एशिया महाद्वीप, भरतखण्ड के नाम से जिन संस्कृति के "जिनशासन" नामकरण से समक्ष संगठित और अनुशासित गणतान्त्रिक साग्राज्य रहा है। कालान्तर में विभिन्न कारणों से इस प्राचीन संस्कृति में विद्यटन होने के कारण 2035 से जिन संस्कृति पराभव की ओर अग्रसर है।
हमारे लिये अत्यन्त खेद का विषय है कि वर्तमान पूरे एशिया महाद्वीप की सभ्यता के रचनाकार राष्ट्रपुरूष ऋषभदेव के जन्म या निर्वाण दिवस पर इस देश में सार्वजनिक अवकाश द्योषित नहीं है। आखीर क्यों ? जबकि भारत गणतन्त्र का नाम ही ऋषभदेव पुत्र भरत के नाम से भारतवर्ष है।
आपसे समग्र जैन समाज का आग्रह है कि मानव संस्कृति के रचनाकार राष्ट्रपुरूष ऋषभदेव के जन्म एवं निर्वाण तिथियों पर देश में सार्वजनिक अवकाश द्योषित किया जाये। साथ ही देश की आबादी का मात्र 0.40 प्रतिशत जनसंख्या वाले जैन समुदाय को अल्पसंख्यक द्योषित करने की अधिसूचना भी जारी करवाई जाये।
आपके हैं हम, आग्रहकर्ता,
समग्र जैन समाज की ओर से
जैन यूनाईटेड लिबरेशन फ़्रण्ट